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हिन्दी दिवस 

14 Sep

​संस्कृत की एक लाड़ली बेटी है ये हिन्दी।

बहनों को साथ लेकर चलती है ये हिन्दी।
सुंदर है, मनोरम है, मीठी है, सरल है,

ओजस्विनी है और अनूठी है ये हिन्दी।
पाथेय है, प्रवास में, परिचय का सूत्र है,

मैत्री को जोड़ने की सांकल है ये हिन्दी।
पढ़ने व पढ़ाने में सहज है, ये सुगम है,

साहित्य का असीम सागर है ये हिन्दी।
तुलसी, कबीर, मीरा ने इसमें ही लिखा है,

कवि सूर के सागर की गागर है ये हिन्दी।
वागेश्वरी का माथे पर वरदहस्त है,

निश्चय ही वंदनीय मां-सम है ये हिंदी।
अंग्रेजी से भी इसका कोई बैर नहीं है,

उसको भी अपनेपन से लुभाती है ये हिन्दी।
यूं तो देश में कई भाषाएं और हैं, 

पर राष्ट्र के माथे की बिंदी है ये हिन्दी।

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1 Comment

Posted by on September 14, 2016 in poems

 

One response to “हिन्दी दिवस 

  1. सत्यार्चन.SathyArchan

    November 16, 2016 at 12:30 PM

    वाह…
    हिन्द-हिन्दू-हिन्दी हित हेतु संकल्पित
    हम भी हैं…
    शुभ परिचय से शुभारंभ कीजिये …
    परिणाम भी भला होगा…
    .
    ज्ञानी कहते हैं कि
    सपने होंगे तब ही तो सच होने पर बात होगी
    सपने जरूरी हैं …
    बड़े सपने…
    .
    आपका ब्लाग भी आपके लिये
    बहुत बड़ा हो सकता है
    आप चाहें तो
    हमारी अनौखी परस्पर सहयोग योजना में
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    लेखन हिन्दुस्तानी के वर्तमान और भावी सदस्यों का!!!!!!
    (व्यक्तिगत संदेश पर विस्तृत जानकारी पाइये, हमें फालो कीजिये… अभी …)
    – सत्यार्चन

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